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सांविधिक निकाय

राष्‍ट्रीय पटसन बोर्ड, कोलकाता

राष्‍ट्रीय पटसन बोर्ड अधिनियम, 2008 (2009 का 12) के अनुसार दिनांक 1 अप्रैल, 2010 को राष्‍ट्रीय पटसन बोर्ड (एनजेबी) का गठन किया गया है और इसी दिन से यह प्रभावी हो गया था तथा पूर्व के पटसन विनिर्माण विकास परिषद और राष्‍ट्रीय पटसन विविधीकरण केंद्र को राष्‍ट्रीय पटसन बोर्ड (एनजेबी) में मिला दिया गया। एनजेबी को सांविधिक रूप से निम्‍नलिखित कार्य करने का अधिदेश दिया गया है:-

  • योजनाएं तैयार करने, विस्‍तार कार्य के मामलों में पटसन की फसल करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने, पटसन की उपज बढ़ाने और उसकी गुणवत्‍ता में सुधार करने वाली योजनाओं का क्रियान्‍वयन और मूल्‍यांकन करना;
  • कच्‍ची पटसन की कीमतों के बेहतर विपणन और स्थिरीकरण के लिए व्‍यवस्‍था करना या बढ़ावा देना;
  • कच्‍ची पटसन के प्रसंस्‍करण, गुणवत्‍ता, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की तकनीको में सुधार करने के लिए अध्‍ययन और अनुसंधान में सहायता प्रदान करना और प्रोत्‍साहित करना;
  • कच्‍ची पटसन और पटसन उत्‍पादों से संबंधित आंकड़ों को एकत्र करना और तैयार करने के उद्देश्‍य वाले अध्‍ययन या सर्वेक्षण को बढ़ावा देना या ये कार्य करना;
  • पटसन उद्योग की कार्य कुशलता और उत्‍पादकता में वृद्धि करके पटसन विनिर्माताओं के उत्‍पादन के विकास को बढ़ावान देना;
  • पटसन क्षेत्र से संबंधित वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी, आर्थिक और विपणन अनुसंधान को प्रायोजित करना, सहायता करना, समन्‍वय करना, प्रोत्‍साहित करना अथवा करना;
  • मौजूदा बाजारों का रख-रखाव करना और उनमें सुधार करना तथा पटसन विनिर्माताओं के लिए देश और विदेश में नए बाजारों का विकास करना तथा घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों में विनिर्माताओं के लिए मांग के अनुरूप विपणन रणनीतियां तैयार करना; और

नई सामाग्रियों, उपकरणों और पद्धतियों का पता लगाने और विकास करने तथा पटसन उद्योग में पहले से प्रयुक्‍त इन कार्यों में सुधार करने सहित उत्‍पादन सामग्री, उपकरण, पद्धति, उत्‍पाद विकास से संबंधित मामलों में वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और आर्थिक अनुसंधन को प्रायोजित करना, सहायता करना, समन्‍वय या प्रोत्‍साहित करना।

अधिक जानकारी के लिए...

पता:
राष्‍ट्रीय पटसन बोर्ड,
(वस्‍त्र मंत्रालय, भारत सरकार)
3ए और बी पार्क प्‍लाजा, 71 पार्क स्‍ट्रीट,
कोलकाता - 700 016


केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी)

केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी), वस्‍त्र मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रणणाधीन सांविधिक निकाय है। संसदीय अधिनियम (1948 का अधिनियम सं. LXI) के तहत वर्ष 1948 में स्‍थापित सीएसबी को रेशम के आयात और निर्यात को शासित करने वाली नीतियां तैयार करने सहित देश में रेशम यार्न के उत्‍पादन के लिए फूड प्‍लांट्स से लेकर रेशम कोकून के विकास में रेशम उद्योग के सभी क्रियाकलापों को शामिल करते हुए रेशम उद्योग के विकास की पूरी जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। सीएसबी मूलत: अनुसंधान और विकास संगठन है। सीएसबी के महत्‍वूपर्ण क्रियाकलापों में रेशम क्षेत्र में वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और आर्थिक अनुसंधान करना, सहायता प्रदान करना और प्रोत्‍साहित करना है। रेशम उत्‍पादन और रेशम टेक्‍सटाइल्‍स उद्योग के विकास के कार्यक्रम मूलत: राज्‍य रेशम उत्‍पादन/वस्‍त्र विभागों द्वारा तैयार और क्रियान्वित किए जाते हैं। तथापि, केंद्रीय रेशम बोर्ड समूचे देश में फैले केंद्रों के नेटवर्क के माध्‍यम से अनुसंधान और विकास, विस्‍तार तथा प्रशिक्षण के लिए आवश्‍यक सहायता प्रदान कर राज्‍यों के प्रयासों में उनकी सहायता करता है। इसके अलावा, केंद्रीय रेशम बोर्ड, अच्‍छी किस्‍म के बुनियादी रेशम कीटों और वाणिज्यिक बीजों का उत्‍पाद तथा आपूर्ति करता है तथा साथ ही रेशम उद्योग की विभिन्‍न परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में राज्‍यों की सहायता भी करता है। इसके अतिरिक्‍त केंद्रीय रेशम बोर्ड, राष्‍ट्रीय और वैश्विक स्‍तर पर रेशम उत्‍पादन संबंधी आंकड़े एकत्र और उनका समेकन करता है।

अधिक जानकारी के लिए...

पता:
केंद्रीय रेशम बोर्ड
केंद्रीय रेशम बोर्ड काम्‍प्‍लेक्‍स,
बी.टी.एम. लेआउट,
बैंगलूरू - 560 068


वस्‍त्र समिति

वस्‍त्र समिति की स्‍थापना आंतरिक और निर्यात, दोनों बाजारों से अच्‍छी किस्‍म के टेक्‍सटाइल्‍स सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से वस्‍त्र समिति अधिनियम,1963 के तहत जुलाई, 1964 में की गई थी। इसके कार्यों में टेक्‍सटाइल्‍स, वस्‍त्र निर्यात को बढ़ावा देना, तकनीकी और आर्थिक क्षेत्र में अनुसंधान, टेक्‍सटाइल्‍स और टेक्‍सटाइल्‍स मशीनरी के लिए मानक स्‍थापित करना, प्रयोगशालाएं खोलना और पूरे देश से आंकड़े एकत्र करना शामिल है। वस्‍त्र समिति का मुम्‍बई में मुख्‍यालय के अतिरिक्‍त 28 क्षेत्रीय कार्यालय हैं, 9 इको-पैरामीटर टेस्टिंग प्रयोगशालाओं सहित इनमें से 17 प्रयोगशालाएं हैं।

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पता:
वस्‍त्र समिति
वस्‍त्र मंत्रालय, भारत सरकार,
पी बालू रोड, प्रभादेवी,
मुम्‍बई - 400025


भुगतान आयुक्‍त (सीओपी)

भुगतान आयुक्‍त के कार्यालय का मुख्‍यालय दिल्‍ली में है। यह वस्‍त्र मंत्रालय का 18वां सांविधिक प्राधिकरण है। इसका गठन रुग्‍ण वस्‍त्र उपक्रम (राष्‍ट्रीयकरण) अधिनियम, 1947 की धारा 17(1), स्‍वदेशी कपास मिल कंपनी लि. (उपक्रमों का अर्जन एवं अंतरण) अधिनियम, 1986 की धारा 15(1) और साथ ही वस्‍त्र उपक्रम (राष्‍ट्रीयकरण) अधिनियम, 1995 की धारा 17(1) के तहत किया गया है। भुगतान आयुक्‍त आवंटित की गई राशि का संवितरण उक्‍त तीनों अधिनियम के तहत राष्‍ट्रीयकृत प्रत्‍येक वस्‍त्र उपक्रम को करता है।

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पता:
स्‍कोप काम्‍प्‍लेक्‍स
नई दिल्‍ली


राष्‍ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्‍थान (एनआईएफटी)

राष्‍ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्‍थान (एनआईएफटी) का गठन वस्‍त्र उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए पेशेवर लोगों को तैयार और प्रशिक्षित करने के लिए न्‍यूयार्क के फैशन प्रौद्योगिकी संस्‍थान (एफआईटी) के सहयोग से स्‍वायत्‍त निकाय के रूप में वर्ष 1986 में किया गया था। सरकार ने दिनांक 14 जुलाई, 2006 को राष्‍ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्‍थान अधिनियम, 2006 को प्रभावी बनाया। यह अधिनियम संस्‍थान को सांविधिक स्‍टेटस प्रदान करता है और फैशन प्रौद्योगिकी क्षेत्र में इसके नेतृत्‍व को औपचारिक मान्‍यता प्रदान करता है। अधिनियम ने एनआईएफटी को 2007 के आगे के वर्षों में अपने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान करने की शक्ति प्रदान की। भारत के राष्‍ट्रपति इस संस्‍थान के विजिटर हैं। संस्‍थान ने नई दिल्‍ली, बेंगलुरु, चेन्‍नई, गांधीनगर, हैदराबाद, कोलकाता, मुम्‍बई, कन्‍नूर, पटना, शिलांग, कांगड़ा, भोपाल, रायबरेली, भुवनेश्‍वर और जोधपुर स्थित अपने केंद्रों के माध्‍यम से समूचे देश में फैशन व्‍यवसाय की शिक्षा में क्रांति का सूत्रपात किया है।

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पता:
हौज खास,
गुलमोहर पार्क के निकट,
नई दिल्‍ली - 110016

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